कैसा रहेगा 1 अप्रैल से शुरू हो रहा नया वित्त वर्ष निवेशकों के लिए! टैरिफ वार-RBI की कर्ज नीति तय करेगी बाजार की दिशा

Indian Stock Market: इस हफ्ते से नए वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत हो रही है. छह महीने बिकवाली करने के बाद विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी हो रही है. ऐसे में निवेशकों के मन में ये सवाल है कि नया वित्त वर्ष कैसा रहेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से जुड़े एलानों के साथ अप्रैल 2025 के दूसरे हफ्ते में आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक पर भी बाजार की नजर रहेगी जिसमें ब्याज दरों में कमी की उम्मीद की जा रही है. 

बीता हफ्ता शेयर बाजार के लिए मिलाजुला रहा है. इस सप्ताह निफ्टी 50 और सेंसेक्स 30 सूचकांकों में मामूली बढ़त दर्ज की गई, जबकि बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने कमजोर प्रदर्शन किया और गिरावट के साथ बंद हुए. कमजोर वैश्विक संकेतों और आगामी अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंताओं के बावजूद, बाजार में विदेशी निवेशकों की सकारात्मक धारणा जारी रही. बाजार के जानकारों के मुताबिक हाल के महीनों में लगातार बिकवाली के बाद, पिछले कुछ सत्रों में एफआईआई शुद्ध खरीदार बन गए हैं 

नई (अप्रैल) सीरीज के पहले दिन 28 मार्च को बाजार में उतार-चढ़ाव रहा. सेंसेक्स 191.51 अंक या 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,414.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 72.60 अंक या 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,519.35 पर बंद हुआ. चॉइस ब्रोकिंग के एक नोट के अनुसार, सप्ताह के लिए, सेंसेक्स और निफ्टी में 0.5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, महीने के लिए 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और वित्त वर्ष 2024-25 में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इस बीच, इंडिया वीआईएक्स 5.31 प्रतिशत गिरकर 12.5750 पर आ गया, जो बाजार में कम अस्थिरता का संकेत देता है. 

बीडीओ इंडिया के फाइनेंशियल सर्विस टैक्स, टैक्स और रेगुलेटरी सर्विस के पार्टनर और लीडर मनोज पुरोहित ने कहा कि एफआईआई प्रवाह हरे निशान में शुरू हुआ है, जिससे वित्त वर्ष के अंतिम सप्ताह के बावजूद भारतीय बाजार में उत्साह लौट आया है, जिसमें आमतौर पर भारी मुनाफावसूली देखी जाती है. उन्होंने आगे कहा, “दूसरी ओर, एफपीआई कम्युनिटी से संबंधित सेबी द्वारा अपनी बोर्ड बैठक में की गई प्रमुख घोषणाओं में से एक ने एफपीआई को प्रोत्साहित किया है.”
कुल मिलाकर, यह पूंजी बाजार नियामक द्वारा समय पर उठाया गया कदम है, जिसमें विदेशी निवेशक भारत के प्रति सतर्क रुख अपना रहे हैं. अब सभी की निगाहें अमेरिका के संभावित टैरिफ प्रतिबंधों और आरबीआई के अपनी समीक्षा बैठक में संभावित दर कटौती पर की जाने वाली आगामी घोषणाओं पर टिकी हैं. 

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मुंबई के जाने-माने बिल्डर के खिलाफ ED ने लिया बड़ा एक्शन, 400 करोड़ फ्राॅड मामले में संपत्ति जब्त

ED Action on Mumbai Builder: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के क्षेत्रीय कार्यालय मुंबई ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिल्डर ललित टेकचंदानी और उनके सहयोगियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. इस क्रम में ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उसकी कई संपत्तियों को कुर्क करने का अनंतिम आदेश जारी है. इनमें दुबई में एक विला, मुंबई में कई आवासीय और कमर्शियल प्रोजेक्ट, पुणे में कई चल और अचल संपत्ति, भूमि पार्सल और फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं. इनकी कुल कीमत 44.07 करोड़ रुपये है. 

फ्लैट खरीदारों से 400 करोड़ की धोखाधड़ी

टेकचंदानी और उसके 15 सहयोगियों पर फ्लैट खरीदने वालों से 400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. ईडी की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है, पूछताछ से पता चला है कि घर खरीदने वालों से पैसे ऐंठ कर टेकचंदानी ने इस पैसे का इस्तेमाल अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियों को खरीदने के लिए किया. फाइनेंशियल फ्रॉड के इस मामले में ईडी ने इससे पहले शेयरों, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में 158 करोड़ रुपये के इंवेस्टमेंट को जब्त किया था. 

1,700 से ज्यादा लोगों से ऐंठे पैसे

ईडी की जांच के मुताबिक, टेकचंदानी ने एक हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए 1,700 से ज्यादा घर खरीदारों से 400 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए. बाद में खरीदारों को न तो फ्लैट मिले और न ही रिफंड मिल पाया. जांच में खुलासा हुआ कि घर खरीदने वालों से लिए गए पैसे का इस्तेमाल अलग-अलग नामों से संपत्ति खरीदने में किया गया है. इनमें टेकचंदानी के परिवार के सदस्यों के नाम भी शामिल हैं.  

मार्च 2024 में गिरफ्तार हुआ टेकचंदानी

ED ने यह जांच भारतीय दंड संहिता  (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत तलोजा और चेंबूर पुलिस स्टेशनों में दर्ज दो एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि टेकचंदानी सहित कई अन्य लोगों ने मिलकर मेसर्स सुप्रीम कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड ने नवी मुंबई के तलोजा में एक हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए घर खरीदने वालों से पैसे लिए थे. मार्च 2024 में ललित टेकचंदानी की गिरफ्तारी की गई थी और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है. 

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NCR में तेजी के साथ उभर रहा सोनीपत, अगर घर लेने का है प्लान जानें क्या कहतें हैं Real Estate एक्सपर्ट

सोनीपत एक उभरते हुए रियल एस्टेट हब के तौर पर तेजी के साथ उभर रहा है. दिल्ली के उत्तरी किनारे पर रणनीतिक रूप से स्थित सोनीपत तेजी से बढ़ते औद्योगिक परिदृश्य और बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ, टियर-2 शहर से निवेशकों और व्यवसायों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य में बदल रहा है. कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे, प्रस्तावित रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) और हाल ही में दिल्ली से सोनीपत तक मेट्रो विस्तार की मंजूरी जैसे राजमार्गों के माध्यम से बढ़ी हुई कनेक्टिविटी ने शहर के आकर्षण को और बढ़ा दिया है.

सोनीपत का आकर्षण इसकी सस्ती संपत्ति की कीमतों और रहने की कम लागत से उपजा है, जो इसे मध्यम आय वाले आवास और वाणिज्यिक विकास के लिए एक आशाजनक गंतव्य के रूप में स्थापित करता है. दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे (डीएमआईसी) के हिस्से के रूप में योजनाबद्ध स्मार्ट औद्योगिक पार्क और लॉजिस्टिक्स हब सहित हाल ही में बुनियादी ढांचे में प्रगति बड़े पैमाने पर निवेश ला रही है. ₹18,000 करोड़ की लागत से बनने वाला मारुति सुजुकी का आगामी विनिर्माण संयंत्र रोजगार को बढ़ावा देगा और कुशल कार्यबल को आकर्षित करेगा, जिससे आवासीय और वाणिज्यिक दोनों संपत्तियों की मांग बढ़ेगी.

डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉपइक्विटी के अनुसार, बढ़ते उपभोक्ता विश्वास और आर्थिक लचीलेपन को दर्शाते हुए, भारत के टॉप 30 टियर II शहरों में हाउसिंग सेल्स वित्तीय वर्ष 2023-24 में 11 प्रतिशत बढ़कर लगभग 2.08 लाख यूनिट्स हो गई. बिक्री में यह वृद्धि आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे में प्रगति और मध्यम वर्ग के परिवारों में घर खरीदने की बढ़ती इच्छा सहित कई कारकों से प्रेरित रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की मजबूत मांग को रेखांकित करती है.

नॉर्थ जोन में हाउसिंग सेल्स – भिवाड़ी, जयपुर, मोहाली, लखनऊ, भोपाल, चंडीगढ़, देहरादून, लुधियाना, आगरा, सोनीपत, पानीपत और अमृतसर में हाउसिंग यूनिट्स ने 2023-24 में 26,308 यूनिट्स की बिक्री देखी गई, जो 2022-23 में 24,273 घरों से 8% अधिक है.

शहर के विकसित होते परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए, हीरो रियल्टी के सीईओ मधुर गुप्ता कहते हैं, “रणनीतिक रूप से स्थित सोनीपत अपने बेहतरीन बुनियादी ढांचे के साथ एनसीआर क्षेत्र में रियल एस्टेट पावरहाउस के रूप में तेजी से उभर रहा है. केएमपी एक्सप्रेसवे और आगामी दिल्ली-मुंबईइंडस्ट्रियल कॉरीडोर, उत्तर भारत में एक प्रमुख शिक्षा केंद्र के रूप में सोनीपत की स्थिति के अलावा, इसके विकास को और बढ़ावा दे रहे हैं. आगामी रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा, जिससे एनसीआर रियल एस्टेट परिदृश्य में सोनीपत की प्रमुख भूमिका मजबूत होगी. पिछले साल की शुरुआत में, हीरो रियल्टी ने सोनीपत में अपना प्लॉटेड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, हीरो अर्थ स्वर्णपथ लॉन्च किया था, और खरीदारों से सकारात्मक प्रतिक्रिया पाकर अभिभूत है. इस क्षेत्र की अपार संभावनाएं और हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण पूंजी वृद्धि इसे एक आशाजनक निवेश अवसर बनाती है. हम इस क्षेत्र में निरंतर विकास की उम्मीद करते हैं.”

रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशांक वासन ने कहा, “सोनीपत जैसे टियर-2 शहरों में संगठित रियल एस्टेट बाजार का उदय हुआ है, जिससे शहर के लिए उल्लेखनीय वृद्धि और विकास की संभावनाएं पैदा हुई हैं. इस बदलते परिवेश में, दूर से काम करने के बढ़ते चलन के साथ-साथ, सोनीपत वहनीयता और जीवन की गुणवत्ता का एक आकर्षक संयोजन प्रस्तुत करता है. घर खरीदने वाले लोग हरे-भरे इलाकों में बसे इसके विशाल घरों की ओर आकर्षित होते हैं, जो भीड़-भाड़ वाले शहरी इलाकों से एक स्वागत योग्य पलायन प्रदान करते हैं. आगामी रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम व्यापक एनसीआर क्षेत्र में कनेक्टिविटी को और बढ़ाएगा, जिससे रियल एस्टेट बाजार में एक की प्ल्येयर के रूप में सोनीपत की स्थिति मजबूत होगी.”

विकसित होते बाजार की गतिशीलता पर टिप्पणी करते हुए, नियोलिव के फाउंडर एंड सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा, “नियोलिव एक दूरदर्शी लोकाचार को अपनाता है, जहाँ नवाचार और अवसर एक दूसरे से मिलते हैं. हमारा मानना है कि सोनीपत जैसे नए युग के शहर भविष्य की आर्थिक गतिशीलता के केंद्र बनेंगे. उनका आकर्षण सामर्थ्य, पहुँच और जीवनशैली सुविधाओं के सामंजस्यपूर्ण मिश्रण में निहित है, जो रहने के नए आरामदायक आश्रय प्रदान करते हैं. जैसे-जैसे रहने की प्राथमिकताएँ विकसित होती हैं और सरकारी पहल जड़ पकड़ती हैं, ये शहर रियल एस्टेट की कहानी को नया रूप देने के लिए विशिष्ट रूप से तैयार हैं, जो निवेशकों, घर के मालिकों और व्यवसायों को समान रूप से आकर्षित करते हैं. सोनीपत बेल्ट के आसपास के क्षेत्र में आने वाले मारुति सुजुकी प्लांट जैसे बड़े वैश्विक स्तर के उद्योगों के उभरने के साथ, ये स्थान मध्यम आय वाले आवास परियोजनाओं और प्लॉट किए गए विकास की मांग को बढ़ाने के लिए तैयार हैं, जो जीवंत आवासीय पड़ोस में बदल रहे हैं”

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ATM निकासी से लेकर LPG कीमतें तक… 1 अप्रैल से होने जा रहे ये बड़े बदलाव, आपकी जेब पर होगा सीधा असर

अगले वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल 2025 में कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं, जिसका आपकी जेब पर सीधा असर होने जा रहा है. यानी घर की रसोई से लेकर बैंक एकाउंट और क्रेडिट कार्डधारकों तक सभी पर इसका असर पड़ने जा रहा है. सबसे पहले बैंक एकाउंट्स और क्रेडिट के बारे में जानते हैं कि क्या कुछ बदलाव होने जा रहा है. 

क्रेडिट कार्ड पर बदलाव

क्रेडिट कार्डधारकों के लिए अगले वित्त वर्ष में कई ऐसे बदलाव होने जा रहे हैं, जो इससे इस्तेमाल करने वालों पर असर डाल सकते हैं. एक तरफ से एबीआई से सिम्पली क्लिक क्रेडिट कार्ड ने स्विगी रिवॉर्ड के प्वाइंट्स को 10 गुणा से घटाकर 5 गुणा करने का एलान किया तो वहीं एयर इंडिया सिग्नेटर पॉइंट्स को 30 से कम कर 10 करने की घोषणा की है.

एलपीजी पर असर

तेल और गैंस वितरण कंपनियां हर महीने की पहले तारीख को रसोई गैस की कीमतों को रिवाइज करती है. ऐसे में अगले महीने की एक तारीख में इसमें आपको कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है. हालांकि, लंबे समय से रसोई गैस की कीमतों में किसी तरह का इजाफा नहीं हुई है. लेकिन ऐसे उम्मीद की जा रही है कि नए वित्त वर्ष में रसोई गैस में कुछ राहत मिल सकती है. जबकि, बात अगर अगर गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की कीमतों की करें तो कुछ बदलाव हो सकते हैं.

बैंक खातों से जुड़े बादलाव

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पीएनबी समेत कई अन्य बैक ने मिनिमम बैंक बैलेंस में बदलाव कर रहे हैं. अब सेक्टर वाइज के आधार पर ही मिनिमम बैंलेंस की नई सीमा तय होगी और उन पर चार्च किया जाएगा. ऐसे में इसका सीधा बैंक खाता धारकों की जेब पर असर होगा.

गौरतलब है कि अलग-अलग बैंकों की इस वक्त मिनिमम बैंलेंस की सीमा अलग अलग है. अगर उस मिनिमम बैलेंस के नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो बैंक खाताधारकों पर फाइन लगाया जाता है. इसमें आगे कुछ बदलाव हो सकता है.

बंद होंगे कई यूपीआई एकाउंट्स

आजकल पेमेंट के लिए यूपीआई काफी चलन में है. लेकिन ऐसे मोबाइल नंबर जो यूपीआई एकाउंट्स से तो जुड़े हैं लेकिन वे एक्टिव नहीं है तो उसे 1 अप्रैल से बंद कर दिया जाएगा. इसके साथ ही, उसे बैंक के रिकॉर्ड से भी हटा दिया जाएगा. मतलब ये कि आपका कोई मोबाइल नंबर यूपीआई से तो जुड़ा है, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है तो फिर उसे बंद कर दिया जाएगा.

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ONGC के शेयर देने वाले हैं जोरदार मुनाफा! 52 फीसदी बढ़ सकती है कीमत, जानिए क्या कहती है Jefferies की रिपोर्ट?

अगर आप शेयर बाजार में दिलचस्पी रखते हैं, तो ONGC पर नज़र रखना जरूरी है. दरअसल, Jefferies ने ONGC के लिए ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है और इसका टारगेट प्राइस 375 रुपये प्रति शेयर रखा है. यानी मौजूदा स्तर से 52 फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना है.

शानदार है ONGC का भविष्य!

विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने ONGC के शेयर को लेकर उत्साहजनक भविष्यवाणी की है. फर्म ने कंपनी के शेयर पर ‘खरीदें’ (BUY) की रेटिंग जारी करते हुए 375 रुपये प्रति शेयर का टार्गेट प्राइज तय किया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि गैस और कच्चे तेल की कीमतों में सुधार से कंपनी को लाभ होगा, जिससे FY25 से FY27 के बीच कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) में 14 प्रतिशत की सालाना वृद्धि होने की उम्मीद है.

आपको बता दें, ONGC ने FY26 से FY30 के बीच उत्पादन में 10-12 प्रतिशत की सालाना वृद्धि का लक्ष्य रखा है, जिसका मुख्य आधार मुंबई हाई क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि होगी. जेफरीज की रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि BP कंपनी द्वारा इराक के रुमैला ऑयल फील्ड में समान भूवैज्ञानिक संरचना वाले क्षेत्र में 40 प्रतिशत उत्पादन वृद्धि हासिल करना ONGC के लिए एक पॉजिटिव अप्रोच है.

ONGC के शेयर क्यों उड़ान भर सकते हैं?

दरअसल, Jefferies का मानना है कि तेल और गैस की कीमतों में सुधार की वजह से ONGC के मुनाफे में जबरदस्त उछाल आ सकता है. इसके अलावा, FY25-27 के बीच EPS (Earnings Per Share) में 14 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी हो सकती है.

ONGC का प्रोडक्शन ग्रोथ प्लान

माना जा रहा है कि मुंबई हाई ONGC को प्रोडक्शन बूस्ट देगा. दरअसल, ONGC का लक्ष्य FY26-30 के बीच 10-12 फीसदी कंपाउंडेड ग्रोथ हासिल करना है. इसके अलावा, 2025 के मध्य तक ONGC के क्रूड और गैस उत्पादन में 5-6 फीसदी सालाना ग्रोथ देखने को मिलेगी. वही, ब्रिटिश पेट्रोलियम (BP) पहले ही Rumaila ऑयल फील्ड में 40 फीसदी प्रोडक्शन ग्रोथ हासिल कर चुका है. BP को ONGC के टेक्निकल सर्विस पार्टनर के रूप में शामिल किया गया है, जिससे प्रोडक्शन में बड़ा उछाल आ सकता है.

ONGC के लिए BP की सफलता क्यों अहम है?

दरअसल, मुंबई हाई और इराक का Rumaila ऑयल फील्ड, ये दोनों भूगर्भीय रूप से समान हैं. BP ने 8 साल में Rumaila की उत्पादन क्षमता 40 फीसदी बढ़ाई थी. अगर ONGC मुंबई हाई में इसी मॉडल को अपनाता है, तो कुल रिकवरी दर 30 फीसदी से बढ़कर 50 फीसदी तक जा सकती है.

ONGC को बड़ा फायदा

ONGC को उम्मीद है कि FY26 तक 20 फीसदी गैस उत्पादन नए प्राइसिंग सिस्टम के तहत आएगा ($8.5/mmbtu) और FY30 तक 100 फीसदी उत्पादन इस दर पर होगा. वहीं, बेस नॉमिनेशन फील्ड गैस की कीमतों में हर साल $0.25/mmbtu की वृद्धि होगी, जिससे कंपनी का लाभ मार्जिन और मजबूत होगा.

क्रूड बिजनेस में भी बड़ा मुनाफा

रिपोर्ट के अनुसार, ONGC यह मानकर चल रहा है कि जब तक क्रूड की कीमत $100/bbl से नीचे रहेगी, तब तक विंडफॉल टैक्स नहीं लगेगा. इससे विदेशी कंपनियों को निवेश करने में आसानी होगी. इसके अलावा, ONGC की Ayana Power में हुई नई डील सौर ऊर्जा और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में उसके विस्तार की ओर इशारा करती है. ONGC का लक्ष्य 14 फीसदी इक्विटी रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (IRR) हासिल करना है, जिससे कंपनी को लॉन्ग टर्म में स्थिर मुनाफा मिल सके.

क्या ONGC में निवेश करना फायदेमंद होगा?

Jefferies का कहना है कि ONGC के शेयरों में अभी बहुत संभावनाएं हैं. अगर कंपनी अपने प्रोडक्शन ग्रोथ प्लान और गैस-क्रूड प्राइसिंग रिफॉर्म्स पर सही तरीके से अमल करती है, तो निवेशकों को जबरदस्त मुनाफा मिल सकता है.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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RBI अगले महीने कितना सस्ता करने जा रही लोन ईएमआई? कर दी गई भविष्यवाणी

अगले महीने आरबीआई लोन ईएमआई में राहत दे सकती है. ऐसा साख तय करने वाली रिसर्च एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की तरफ से अपने पूर्वानुमान में बताया गया है. उसने गुरुवार को बताया कि आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने की कोशिश के तहते अप्रैल में अपनी समीक्षा बैठक में प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.25% की कटौती कर सकता है.

 फाइनेंशियल ईंयर 2026 में होनेवाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक की तारीख का आरबीआई ने ऐलान कर दिया है. ये बैठक 7, 8 और 9 अपैल को होगी. रिजर्व बैंक की तरफ से 9 अप्रैल को पॉलिसी रेट की घोषणा की जाएगी.

इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री और सार्वजनिक वित्त प्रमुख देवेंद्र कुमार पंत ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2024-25 में सकल (हेडलाइन) मुद्रास्फीति घटकर 4.7 प्रतिशत रहेगी. वित्त वर्ष 2025-26 में मौद्रिक नीति में कुल मिलाकर 0.75 प्रतिशत तक की कटौती हो सकती है.’’ उन्होंने कहा कि हालांकि, अगर अमेरिका के जवाबी शुल्क का प्रभाव अपेक्षा से अधिक हुआ, तो ऐसे में आरबीआई मौद्रिक नीति के मोर्चे पर अधिक ढील दे सकता है.

आरबीआई ने ऊंची महंगाई दर के कारण लंबे समय तक प्रमुख नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया था. केंद्रीय बैंक ने मई, 2022 और फरवरी, 2023 के बीच नीतिगत दर को 2.50 प्रतिशत बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया था. फरवरी, 2025 में, रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर इसे 6.25 प्रतिशत किया गया। इंडिया रेटिंग्स को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2024-25 की मार्च तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति 21 तिमाहियों के अंतराल के बाद चार प्रतिशत से नीचे आ जाएगी. उसे उम्मीद है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2025-26 में तीन बार नीतिगत दर में कुल मिलाकर 0.75 प्रतिशत की कटौती कर सकता है.

 इंडिया रेटिंग्स ने कहा, ‘‘फरवरी, 2025 में नीतिगत दर में कटौती के साथ कुल मिलाकर रेपो दर में एक प्रतिशत की कटौती होने की उम्मीद है. इससे रेपो दर 5.5 प्रतिशत और औसत मुद्रास्फीति लगभग चार प्रतिशत होगी। यानी वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक रेपो दर 1.5 प्रतिशत होगी.’’ रेटिंग एजेंसी ने कहा कि एमपीसी की फरवरी, 2025 में हुई बैठक के ब्योरे से पता चलता है कि आरबीआई धीमी होती वृद्धि की गति से अवगत है. इससे पता चलता है कि कम और स्थिर मुद्रास्फीति आरबीआई का मुख्य लक्ष्य है, लेकिन मौद्रिक नीति के माध्यम से वृद्धि को समर्थन देने पर मौद्रिक नीति का ध्यान होगा.

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आर्थिक मोर्चे पर भारत करने वाला है बड़ा कमाल, पीछे छूटेगा जर्मनी-जापान… IMF ने लगाई मुहर

भारतीय अर्थव्यवस्था जिस रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही है, उससे वह आने वाले दिनों में जापान और फिर जर्मनी को पीछे छोड़ देगा. ये कहना है अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का. आईएमएफ की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पिछले दस वर्षों के दौरान दोगुने यानी 2015 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर के मुकाबले 2025  में ये बढ़कर 4.3 ट्रिलियन डॉलर हो गया. जो करीब 105% का ग्रोथ दिखाता है.

आईएमएफ के डेटा के मुताबिक, भारत विकास के रास्ते पर तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है और वित्तीय वर्ष 2025 के तीसरे क्वार्टर में ये जापान को पीछे छोड़ देगा. और 2027 में जापान को भी पीछे छोड़ते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था के मामले में सिर्फ अमेरिका और चीन से ही पीछे रह जाएगा.

जापान का इस वक्त जीडीपी 4.4 ट्रिलियन डॉलर है. अगर भारत की विकास की रफ्तार इसी तरह से कायम रहती है तो 2025 के दूसरे क्वार्टर में दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था जर्मनी को पीछे छोड़ देगा. जर्मनी का वर्तमान में जीडीपी 4.9 ट्रिलियन डॉलर है.

इससे पहले वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के 10 वर्ष साल के अर्थव्यवस्था की परफॉर्मेंस को बेहतरीन बताया और एक दशक में देश की जीडीपी दोगुने होने की सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत जी7, जी20 से लेकर ब्रिक्स तक अपनी अर्थव्यवस्था को आकार देने में सभी देशों से आगे निकल गया. 

उन्होंने कहा- ग्लोबल शिफ्ट हकीकत है. पिछले एक दशक में पीएम मोदी की अगुवाई में भारतीय अर्थव्यवस्था दोगुनी हुई है और जल्द ही दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है.

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मक्खन जैसी होगी नेशनल हाइवे, सड़कों के रखरखाव के लिए सरकार ने 9,599 करोड़ की दी मंजूरी

National Highways Maintenance: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) नेटवर्क के मेनटेनेंस के लिए सरकार ने चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 25) में 17,884 किलोमीटर लंबाई में शॉर्ट टर्म मेनटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (STMC) को मंजूरी दी है. इसमें 2,842 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. 6,118 किलोमीटर लंबाई की सड़क में परफॉर्मेंस बेस्ड मेनटेनेंस (PBMC) कार्यों की भी मंजूरी दी गई है. इसकी लागत 6,757 करोड़ रुपये है. 

नेशनल हाइवे के मेनटेनेंस के लिए मैकेनिज्म

लोकसभा में एक लिखित बयान में, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के रखरखाव को प्राथमिकता दी है और एक मेनटेनेंस एजेंसी के जरिए सभी NH सेक्शंस के रखरखाव और मरम्मत को सुनिश्चित करने के लिए एक मैकेनिज्म तैयार की है. वर्तमान में देश में 8.11 लाख करोड़ रुपये की लागत से 31,187 किलोमीटर लंबाई में 1,310 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. 

इतने समय तक के लिए होता है कॉन्ट्रैक्ट

STMC कार्यों के लिए कॉन्ट्रैक्ट पीरियड आमतौर पर 1-2 साल के बीच होता है. PBMC कामों का कॉन्ट्रैक्ट लगभग 5-7 साल तक के लिए होता है. सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने और समय-समय पर मेनटेनेंस की जरूरत को कम करने के लिए नई-नई टेक्नोलॉजी और तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार काम शुरू होने से पहले और कम्प्लीट होने का सर्टिफिकेट इश्यू से पहले नेटवर्क सर्वे व्हीकल (NSV) के जरिए सड़क की स्थिति का आकलन करती है. काम पूरा होने के छह महीने के नियमित अंतराल पर मूल्यांकन किया जाता है ताकि यह सुनश्चित किया जा सके कि सड़कों की क्वॉलिटी ठीक है. 

एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर भी काम शुरू

इसके अलावा, सरकार ने इसके अतिरिक्त, सरकार ने फोर लेन और उससे अधिक लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम  (ATMS) के इंस्टॉलेशन पर भी काम शुरू किया है.

गडकरी ने कहा, ”ATMS में कई अलग-अलग तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज की मदद से राजमार्गों की प्रभावी निगरानी में मदद मिलती है, जिससे किसी घटना के रिस्पॉन्स में वक्त कम लगता है और रोड सेफ्टी में सुधार आता है.”

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Gold-Silver Price: बस 10 ग्राम सोना 91 हजार के पार, फिर से बढ़ गई सोने की कीमत; चांदी का भी रेट बढ़ा

Gold-Silver Price: विदेशी बाजारों में मजबूत रूख के बीच गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमत 365 रुपये बढ़कर प्रति 10 ग्राम 91,050 रुपये हो गई. 99.9 परसेंट शुद्ध सोने का भाव बुधवार को प्रति 10 ग्राम 90,685 रुपये पर बंद हुआ था. 99.5 परसेंट तक शुद्ध सोने 365 रुपये बढ़कर 90,600 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि एक दिन पहले इसका भाव 90,235 रुपये प्रति 10 ग्राम था. 

इस वजह से बढ़ रही है सोने की कीमत

HDFC सिक्योरिटीज में कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, ”बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए ऑटो टैरिफ का ऐलान किए जाने के बाद निवेशकों में जोखिम की धारणा बढ़ने से सोने की कीमतें बढ़ी.” इसी तरह से चांदी की कीमत भी 200 रुपए बढ़कर 1,01,700 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है. बुधवार को यह 1,01,500 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव पर बंद हुआ था.

इस बीच, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी के लिए सोने का वायदा भाव 828 रुपये या 0.94 परसेंट बढ़कर 88,466 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड हाई लेवल के करीब पहुंच गया है. इससे पहले 20 मार्च को सोने की कीमतें बढ़कर 89,796 रुपये प्रति 10 ग्राम के अब तक के हाई लेवल पर पहुंच गई थी. इंटरनेशनल मार्केट में हाजिर सोना 34.77 डॉलर या 1.15 परसेंट बढ़कर 3,054.05 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई लेवल के करीब पहुंच गया. 

सोने पर बढ़ रहा है निवेश

LKP सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने कहा, ”अमेरिका के जीडीपी ग्रोथ में आई गिरावट और 2 अप्रैल को अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए जाने की आशंकाओं के बीच सोने की कीमतें बढ़कर 3,050 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गईं. इसके अलावा, कनाडा को सपोर्ट करने के लिए यूरोपीय संघ को दी गई ट्रंप की धमकी का भी बाजार पर असर पड़ा है. इससे सुरक्षित निवेश की मांग और बढ़ गई है.”

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50 हजार रुपये के बन गए 2 करोड़, सिर्फ 2 साल में Multibagger Stock में छप्पर फाड़ 38000% का रिटर्न

शेयर बाजार में जारी उठापटक के बीच मनोरंजन उद्योग की कंपनी के एक शेयर ने निवेशकों को धांसू रिटर्न दिया है और वो भी महज दो साल के अंदर. बीएसई के आंकड़ों की मानें तो सिर्फ एक साल में शेयर 15381% तक चढ़ चुका है, जबकि 38655% की तेजी दो साल में दिखा है. ये मल्टीबैगर है ‘सब टीवी’ के मालिकाना हक रखने वाली कंपनी श्रीअधिकारी ब्रदर्स टेलीविज नेटवर्क लिमिटेड.

दबंग, मस्ती, धमाल गुजरात, दिल्लगी और मायबोली चैनल्स इसके पास है. इसके पास 2024 के दिसंबर महीने के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 59.33% की हिस्सेदारी थी. 26 मार्च 2025 को श्रीअधिकारी ब्रदर्स टेलीविजन नेटवर्क का शेयर 2% की बढ़त के साथ अपर सर्किट में 585.20 पर बंद हुआ था. जबकि 2023 में 24 मार्च को इस शेयर की कीमत 1.51 रुपये थी.

इस तरह, दो साल के रिटर्न 38,655% के बेसिस पर कैलकुलेट करें तो दो साल पहले शेयर में लगाए गए बीस हजार रुपये आज बढ़कर करीब सतहत्तर लाख रुपये या उससे ज्यादा बन जाएंगे. 

इसी तरह से पचार हजार रुपये का निवेश बढ़कर करीब 2 करोड़ रुपये हो गया जबकि तीस हजार रुपये का निवेश बढ़कर एक करोड़ रुपये हो गया.  एक महीने में शेयर प्राइस में 24% तक उछाल देखने को मिला है, जो साल 2025 में 60% तक नीचे आयी थी.   

गौरतलब है कि साल 1985 में शुरू हुए श्री अधिकारी ब्रदर्स टेलीविजन नेटवर्क देश की पहली पब्लिकली लिस्टेड टेलीविजन प्रोडक्शन कंपनी थी, जिसकी बीएसई पर 1995 में लिस्टिंग हुई थी. पिछले साल इसका रिवेन्यू करीब डेढ़ करोड़ रुपये था, जबकि 2024 के अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रिवेन्यू 2.36 करोड़ रुपये था.

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डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में इंपोर्ट होने वाली कारों पर लगाया 25% ऑटो टैरिफ, भारत पर क्या असर?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंपोर्ट होने वाली कारों और ऑटो पार्ट्स के ऊपर 25% टैरिफ लगाने का एलान किया है. ये नया नियम 2 अप्रैल से लागू हो जाएगा.  ट्रंप ने इसे मुक्ति दिवस (Liberation Day) बताया है. इसी दिन से रेसिप्रोकल सिस्टम भी वहां पर शुरू हो जाएगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अन्य देशों के अमेरिका में व्यवसाय करने पर शुल्क देना होगा. उनका मानना है कि विदेशी कंपनियां अमेरिका से नौकरियां और पैसे ले रही हैं.

ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हम उन देशों पर शुल्क लगाने जा रहे हैं जो हमारे यहां पर व्यवसाय कर रहे हैं और हमारी नौकरियां ले रहे हैं. कई चीजें हम अब लेने जा रहे हैं, जो वे हमसे पिछले कई वर्षों से ले रहे हैं””  

कौन सी गाड़ियां होंगी प्रभावित?

जो गाड़ियां अमेरिका के बाहर बनाकर उसे वहां पर बेची जा रही है, उन पर 25% का टैक्स लगेगा. इसका अमेरिका में बिकने वाली करीब पचास फीसदी गाड़ियों पर असर होगा. ट्रंप ने कहा, हम उन गाड़ियों पर 25% टैरिफ लगाने जा रहे हैं, जो यूनाइटेड स्टेट्स में नहीं बनी हैं. अगर वे वहां पर बनी है तो उस पर किसी तरह का कोई टैरिफ नहीं लगेगा.

किस पर लागू होगा टैरिफ

*आयात होनेवाली पैसेंजर गाड़ियां जैसे सेडान, एसयूवी और मिनिवैन
*लाइट ट्रक
*महत्वपूर्ण ऑटोमोबाइल पार्ट्स जैसे- इंजन, ट्रांसमिशन्स और इलैक्ट्रिक कंपोनेंट्स
*व्हाइट हाउस के मुताबिक, अगर जरूरत पड़ी तो इस सूची में और पार्ट्स शामिल किए जा सकते हैं.

टैरिफ का बढ़ेगा दायरा

व्हाइट हाउस के अधिकारी ने बताया कि इस नए टैक्स के लगाने से अमेरिकी सरकार को करीब 100 बिलियन डॉलर की आय होगी. ट्रंप की तरफ से कुछ और आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगाने का विचार किया जा रहा है. उन्होंने फार्मास्यूटिकल्स को एक प्रमुख क्षेत्र बताया है, क्योंकि अमेरिकी में बेची जानेवाली कई दवाएं चीन या फिर आयरलैंड में तैयार की जा रही हैं.

भारत पर क्या असर

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से लगाए जाने वाले ऑटो टैरिफ का आखिर भारत पर क्या कुछ असर होनेवाला है? दरअसल, भारत की तरफ से कई कारें बनाई जा रही हैं, लेकिन उन्हें विकासशील देशों में बेची जा रही है, न कि अमेरिका में. भारतीय कार उद्योग की तरफ से अमेरिका में बहुत ज्यादा कारें नहीं निर्यात की जा रही है. लेकिन, ट्रंप की इस नई ट्रेड पॉलिसी से भारत की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री प्रभावित हो सकती है. भारत के ऑटो पार्ट्स मेकर जैसे- मदरसन ग्रुप, सनसेरा इंजीनियरिंग लिमिटेड और सुप्रजीत इंजीनियरिंग लिमिटेड का अमेरिका एक महत्वपूर्ण बाजार है. 

इस नए रेसिप्रोकल टैरिफ पर डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यूएस टैरिफ वास्तविक तौर पर उतना चार्ज नहीं कर रहा है, जितना अमेरिकी उत्पाद पर लगाया जा रहा है. हालांकि, उन्होंने ये साफ किया कि दुनिया के सभी देश इससे प्रभावित होंगे. इन शिकायतों के बावजूद कि अन्य देश अमेरिका को लेकर निष्पक्ष नहीं रहा है, राष्ट्रपति ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका अलग तरह से कदम उठाएगा. 

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8th Pay Commission Salary Hike: 8वें वेतन आयोग में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ेगी पता चल गया! Goldman Sachs ने किया खुलासा

8th Pay Commission Salary Hike: 8वां वेतन आयोग को लेकर जब से घोषणा हुई है, तब से सरकारी कर्मचारियों को इस बात की चिंता है कि आयोग के लागू होने पर उनकी सैलरी में कितना इजाफा होगा. लेकिन, अब उनका इंतजार खत्म होता नजर आ रहा है. दरअसल, गोल्डमैन सैक्स ने इसे लेकर एक अनुमान लगाया है, जिससे पता चलता है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी.

क्या कहती है Goldman Sachs की रिपोर्ट

Goldman Sachs की रिपोर्ट के अनुसार, 8th Pay Commission लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 14,000 से 19,000 तक की बढ़ोतरी हो सकती है. इसके साथ ही गोल्डमैन सैक्स ने अनुमान लगाया है कि यह बढ़ोतरी 2026 या 2027 में लागू हो सकती है.

इसे आसान भाषा में समझिए

फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों की औसत सैलरी 1 लाख रुपये प्रति महीना (टैक्स से पहले) है. 8वें वेतन आयोग के बाद इसमें 14 से 19 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है. इसके लिए तीन संभावित योजनाएं बनाई गई हैं. अगर सरकार 1.75 लाख करोड़ का बजट रखती है (50 फीसदी सैलरी और 50 फीसदी पेंशन बढ़ोतरी के लिए), तो औसत सैलरी में 14,600 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी होगी. वहीं, अगर 2 लाख करोड़ का बजट रखा जाता है, तो सैलरी में 16,700 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी होगी. जबकि, अगर 2.25 लाख करोड़ आवंटित किए जाते हैं, तो कर्मचारियों को सैलरी में 18,800 प्रति माह की बढ़ोतरी मिलेगी.

50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनर्स को होगा फायदा

8th Pay Commission से 50 लाख से ज़्यादा सरकारी कर्मचारी और 65 लाख पेंशनर्स को सीधा फायदा मिलेगा. इससे पहले 7वें वेतन आयोग के तहत सरकार ने 1.02 लाख करोड़ खर्च किए थे.

8th Pay Commission कब लागू होगा?

16 जनवरी 2025 को केंद्रीय कैबिनेट ने 8वें वेतन आयोग को मंज़ूरी दी थी. हालांकि, अभी तक आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के नाम तय नहीं हुए हैं. आयोग की रिपोर्ट 2026 या 2027 में लागू हो सकती है.

फिटमेंट फैक्टर से सैलरी में जबरदस्त उछाल

वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर तय किया जाता है, जिससे सैलरी बढ़ती है. 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था और अब मांग की जा रही है कि इसे और बढ़ाया जाए. अगर फिटमेंट फैक्टर 2.57 रहता है, तो न्यूनतम सैलरी 18,000 से बढ़कर 46,260 हो जाएगी. जबकि, न्यूनतम पेंशन 9,000 से बढ़कर 23,130 हो जाएगी. अगर फिटमेंट फैक्टर 1.92 तय होता है, जैसा कि पूर्व वित्त सचिव सुबाष गर्ग का अनुमान है, तो न्यूनतम सैलरी 34,560 होगी. हालांकि, कर्मचारियों की मांग 2.86 फिटमेंट फैक्टर की थी, लेकिन सरकार के लिए इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

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भारत में आने वाली है एयर कंडीशनर की बाढ़, जेब और बिजली दोनों पर बढ़ने वाला है तगड़ा बोझ

भारत में अगले 10 सालों में 13 से 15 करोड़ नए एयर कंडीशनर (AC) जुड़ने वाले हैं. इससे देश की बिजली की मांग 180 गीगावॉट (GW) तक बढ़ सकती है, जिससे पावर सिस्टम पर भारी दबाव पड़ेगा. ये खुलासा हुआ है यूसी बर्कले (UC Berkeley) के इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर (IECC) की एक नई स्टडी में.

बिजली की मांग और संकट की आशंका

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इस बढ़ती मांग पर समझदारी से कदम नहीं उठाए गए, तो भारत को 2026 तक बिजली की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है.

जरूरी फैक्ट्स

भारत में हर साल 1-1.5 करोड़ नए AC लग रहे हैं.

2030 तक AC की वजह से 120 GW, और 2035 तक 180 GW तक बिजली की मांग बढ़ सकती है.

गर्मी बढ़ने से AC की बिक्री 40-50 फीसदी बढ़ी है.

2024 की गर्मी में बिजली की खपत 9-10 फीसदी बढ़ने की संभावना है.

IECC के निकीथ अभ्यंकर ने चेतावनी दी है कि AC बिजली की पीक डिमांड का सबसे बड़ा कारण बनते जा रहे हैं. अगर सही कदम नहीं उठाए गए, तो ब्लैकआउट या महंगे इमरजेंसी सॉल्यूशन्स लेने पड़ सकते हैं.

क्या है समाधान?

रिपोर्ट बताती है कि अगर भारत AC की एनर्जी एफिशिएंसी को दोगुना कर दे, तो, बिजली बचाने के साथ-साथ 2.2 लाख करोड़ की बचत हो सकती है. इसके अलावा, 60 GW बिजली की मांग 2035 तक कम की जा सकती है.

कैसे बढ़ेगी AC की एनर्जी एफिशिएंसी?

ऐसा करने के लिए ऊर्जा प्रदर्शन मानकों (MEPS) को अपडेट किया जाए. वहीं, 2027 से 1-स्टार लेवल को 5-स्टार के बराबर कर दिया जाए. इसके अलावा, हर तीन साल में स्टैंडर्ड को और टाइट किया जाए. भारत की जलवायु के अनुसार AC टेस्टिंग भी बदली जाए. दरअसल, भारत में सिर्फ कूलिंग नहीं, बल्कि नमी कम करने पर भी ध्यान देने की जरूरत है.

इसके अलावा, ‘मेक इन इंडिया’ और PLI स्कीम्स को बढ़ावा मिले. आपको बता दें, पहले से ही 600 से ज्यादा मॉडल 5-स्टार लेवल से बेहतर हैं. इससे भारत सस्टेनेबल और अफोर्डेबल कूलिंग का ग्लोबल हब बन सकता है.

भारत को करना होगा स्मार्ट फैसला

अगर सरकार सही नीति बनाती है और भारतीय कंपनियां एनर्जी एफिशिएंट AC का प्रोडक्शन बढ़ाती हैं, तो बिजली संकट से बचा जा सकता है और उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा. ये भारत के लिए ‘सस्टेनेबल कूलिंग’ की ओर एक बड़ा कदम होगा.

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कंचे वाली सोडा बोतल की दुनिया हुई फैन, सड़क के ठेला से पहुंची सुपरमार्केट, ब्रिटेन से अमेरिका तक डिमांड

अक्सर जब आप प्यासे होते हैं जरूर घर से बाहर निकलने पर कंचे वाली सोडा की बोतल पीया होगा. पेप्सी और कोक के बीच जरूर इस सोडा बोतल की डिमांड कम हुई, लेकिन इस पारंपरिक ब्रांड की विदेशों में खूब धूम है. नींबू सोडा की खाड़ी देशों समेत अमेरिका-ब्रिटेन में काफी मांग हो रही है. कॉमर्स मिनिस्ट्री की विंग कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने बताया कि ग्लोबल मार्केट में इसकी अच्छी खासी मांग है.

समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका, ब्रिटेन से लेकर यूरोप और अन्य खाड़ी देशों में ट्रायल के लिए इस नींबू सोडा पानी को एक्सपोर्ट किया गया और ये ट्रायल सफल रहा. 

फेयर एक्सपोर्ट इंडिया के साथ खाड़ी देशों में इस क्षेत्र की फुटकर चेन लुलू हाइपरमार्केट में अपनी जगह बना ली है. जो ये दर्शाता है कि किस कदर वहां पर इसकी लोकप्रियता और जबरदस्त मांग है. यानी अब इसकी पहुंच सड़क के ठेला से सुपरमार्केट तक हो गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में ये नींबू सोडा ट्रेंडी ड्रिंक के रुप में लोकप्रिय हो रहा है. एपीडा की तरफ से 17 मार्च से लेकर 19 मार्च तक आयोजित किए गए अंतरराष्ट्रीय खाद्य एवं पेय कार्यक्रम (आईएफई) लंदन 2025 के दौरान इसे प्रदर्शित किया था. भारत के इस पारंपरिक प्रसंस्कृत खाद्य को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का एक बड़ा मौका दिया है. 

गौरतलब है कि कंचे वाली बोतल की एक वक्त काफी डिमांड रही. लेकिन, आधुनिक पेय पेप्सी और कोक के बीच इसकी डिमांड काफी कम हो गई थी. ऐसे में ग्लोबली इस कंचे वाली बोतल की डिमांड ने इस क्षेत्र में लगे भारतीय उद्यमियों को उत्साह को दोगुना कर दिया है. साथ ही, इस भारतीय पेय सोडा बोतल की लोकप्रियता का जब दुनिया में स्वाद लिया जा रहा है तो ऐसे में कहीं न कहीं इस तरह के दूसरे ब्रांड को जरूर कड़ी टक्कर मिलेगी.

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Samsung पर आई आफत! इम्पोर्ट ड्यूटी में हेरफर करने का लगा आरोप, 5,150 करोड़ का आया नोटिस

Samsung: भारत सरकार ने सैमसंग और उसके अधिकारियों को 601 मिलियन डॉलर यानी 5,150 करोड़ रुपये का टैक्स और जुर्माना भरने का नोटिस भेजा है. कंपनी पर की-टेलीकॉम इक्विपमेंट्स के इंपोर्ट पर टैरिफ से बचने के लिए गलत तरीकों के इस्तेमाल का आरोप है. बीते कुछ सालों में यह किसी कंपनी को भेजा गया अब तक का सबसे बड़ा टैक्स डिमांड नोटिस है. 

टैक्स डिमांड सैमसंग के नेट प्रॉफिट का बड़ा हिस्सा 

यह टैक्स डिमांड सैमसंग के पिछले साल के 955 मिलियन डॉलर के नेट प्रॉफिट का एक बड़ा हिस्सा है. भारत के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन मार्केट में से एक सैमसंग इस नोटिस को टैक्स ट्रिब्यूनल या कोर्ट में चुनौती दे सकती है. सैमसंग अपने नेटवर्क डिवीजन के जरिए टेलीकॉम इक्विपमेंट्स इम्पोर्ट करती है.

पहले भी आ चुका है नोटिस

इससे पहले साल 2023 में अपने मोबाइल टावरों में इस्तेमाल किए गए जरूरी ट्रांसमिशन कंपोनेंट पर 10 परसेंट टया 20 परसेंट टैरिफ से बचने के लिए इम्पोर्ट को गलत तरीके से क्लासीफाई के लिए कंपनी को नोटिस मिला था. इसे लेकर सैमसंग ने टैक्स अथॉरिटी पर जांच बंद करने का दबाव बनाया था.

कंपनी ने सफाई देते हुए कहा था कि कंपोनेंट पर टैरिफ नहीं लगाया जा सकता. जबकि अधिकारियों को सालों से इसके क्लासीफिकेशन प्रैक्टिस के बारे में पता था. हालांकि,  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 8 जनवरी को कस्टम विभाग के अधिकारियों ने अपने एक आदेश में कंपनी के बयान पर असहमति जताई थी.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा शुल्क आयुक्त सोनल बजाज ने एक आदेश में कहा है कि सैमसंग ने भारतीय कानूनों का उल्लंघन किया है और क्लीयरेंस के लिए कस्टम अथॉरिटी के सामने जानबूझकर झूठे दस्तावेज पेश किए हैं. 

इन सात अधिकारियों पर लगा जुर्माना

सैमसंग को 4,460 करोड़ रुपये (520 मिलियन डॉलर) के भुगतान का आदेश दिया गया है. इसमें बकाया टैक्स अमाउंट और जुर्माना शामिल है. भारत में सैमसंग के सात अधिकारियों पर 81 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया गया है, जिनमें नेटवर्क डिवीजन के वाइस प्रेसिडेंट सुंग बीम होंग, चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर डोंग वोन चू और फाइनेंस के लिए जनरल मैनेजर शीतल जैन के साथ ही सैमसंग में इनडायरेक्ट टैक्स के जनरल मैनेजर निखिल अग्रवाल शामिल हैं. 

2021 में शुरू हुई थी जांच

बता दें कि सैमसंग की ये जांच साल 2021 में तब शुरू हुई, जब अधिकारियों ने मुंबई और दिल्ली में कंपनी के ऑफिसेज की तलाशी की थी. इस दौरान अधिकारियों ने कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, डॉक्यूमेंट्स और ईमेल जब्त किए और पूछताछ शुरू की गई. इस जांच में खुलासा हुआ कि साल 2018 से 2021 तक सैमसंग ने कोरिया और वियतनाम से 784 मिलियन डॉलर यानी 6,711 करोड़ रुपए की वैल्यू के कंपोनेंट के इंपोर्ट पर कोई बकाया नहीं चुकाया है. सरकार का कहना है कि सिग्नल ट्रांसमिट करने वाले ये कंपोनेंट्स टावरों में लगाए जाते हैं और इन पर टैरिफ लगता है. जबकि, कंपनी ने इस पर असहमति जताई थी. 

 

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